बीजेपी ने राज्यसभा उम्मीदवारों की घोषणा की; MP से तरुण चुग, राजस्थान से हरियाणा प्रभारी सतीश पूनिया को कैंडिडेट बनाया, लिस्ट

BJP Rajya Sabha Candidates Tarun Chugh From MP Satish Poonia From Rajasthan

BJP Rajya Sabha Candidates Tarun Chugh From MP Satish Poonia From Rajasthan

BJP Rajya Sabha Candidates: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर होने वाले द्विवार्षिक चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है। गुरुवार (4 जून) को बीजेपी ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और ओडिशा से 11 राज्यसभा उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की। मध्य प्रदेश से बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार घोषित किया गया है। यानि बीजेपी तरुण चुग को अब राज्यसभा भेज रही है। राज्यसभा सांसद बनाए जा रहे तरुण चुग के केंद्र में मंत्री बनने की भी अटकलें हैं।

हरियाणा प्रभारी सतीश पूनिया को कैंडिडेट बनाया

वहीं बीजेपी ने राजस्थान से हरियाणा प्रदेश प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया को राज्यसभा भेजने की तैयारी की है। सतीश पूनिया बीजेपी के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। सतीश पूनिया के साथ-साथ राजस्थान से डॉ. अलका गुर्जर को राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया गया है। इसी तरह गुजरात से राजूभाई शुक्ला, मुकेशभाई राठवा, मानसिंह परमार और जितेंद्र मेघजीभाई कंजरिया को उम्मीदवार बनाया गया है। मणिपुर से ए. शारदा देवी और ओडिशा राज्यसभा उपचुनाव के लिए देबाशीष सामंतराय को कैंडिडेट बनाया गया है।

BJP Rajya Sabha Candidates

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गौरतलब है कि  भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 22 मई को देश के 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव की घोषणा की थी। ECI ने जानकारी दी थी कि इन सीटों पर मौजूदा 24 सदस्यों का कार्यकाल जून-जुलाई 2026 में समाप्त होने वाला है। ये सभी राज्यसभा सदस्य रिटायर हो रहे हैं। जहां इलेक्शन कमीशन ने रिटायर हो रहे इन 24 राज्यसभा सदस्यों की सीटों को भरने के लिए द्विवार्षिक चुनाव का ऐलान किया गया है।

10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर 18 जून को वोटिंग

चुनाव आयोग (ECI) के जारी शेड्यूल मुताबिक, 1 जून से 8 जून तक नामांकन प्रक्रिया चालू रहेगी। वहीं 9 जून को दाखिल नामांकनों की जांच की जाएगी। नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख 11 जून होगी। जबकि 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर गुरुवार 18 जून 2026 को सुबह 9 बजे शाम 4 बजे तक वोटिंग कराई जाएगी और इसी दिन शाम 5 बजे वोटों की गिनती भी होगी। जिसके बाद रिजल्ट की घोषणा कर दी जाएगी।

राज्यसभा चुनाव वाले 10 राज्य कौन से?

देश के जिन 10 राज्यों में 24 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है उनमें आंध्र प्रदेश, गुजरात, झारखंड, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, राजस्थान, अरुणाचल प्रदेश, कर्नाटक और मिजोरम जैसे राज्य शामिल हैं। वहीं किस राज्य की कितनी राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने जा रहा है। आप नीचे फाइल में विस्तार से सारी जानकारी देख सकते हैं और सीटों (24 Rajya Sabha Seats) का विवरण जान सकते हैं।

राज्यसभा का चुनाव कैसे होता है?

राज्यसभा का चुनाव कैसे होता है? आखिर कैसे राज्यसभा के सांसद चुने जाते हैं? आइये जानते हैं। दरअसल राज्यसभा के चुनाव में जनता वोटिंग नहीं करती है बल्कि जनता के चुने हुए विधायक इसमें हिस्सा लेते हैं। इसलिए इस चुनाव में जिस पार्टी के पास विधायकों की संख्या अधिक होती है उस पार्टी के राज्यसभा उम्मीदवार की जीत तय मानी जाती है। हालांकि, यहां ऐसा नहीं है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तरह जिस सदस्य को सबसे ज्यादा वोट मिलेंगे, वह जीत जाएगा। राज्यसभा चुनाव के लिए विधायकों की वोटिंग के साथ एक फॉर्मूला भी तय है।

क्या है राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग का फॉर्मूला?

फॉर्मूला के हिसाब से किसी भी सीट से राज्यसभा सांसद बनने के लिए कितने वोटों की जरूरत होती है, यह पहले से तय होता है। इस फॉर्मूले के तहत एक विधानसभा के कुल विधायकों की संख्या को 100 से गुणा किया जाता है। इसके बाद राज्य में जितनी राज्यसभा की सीटें हैं उसमें एक जोड़ कर भाग दिया जाता है. इसके बाद कुल संख्या में एक जोड़ा जाता है। फिर अंत में जो संख्या निकलती है, उतनी संख्या में विधायकों के वोट किसी उम्मीदवार को राज्यसभा सांसद बनने के लिए चाहिए होते हैं। मतलब अब किसी उम्मीदवार को जीतना है तो उसे सबसे ज्यादा वोट तो चाहिए ही, साथ ही ऊपर बताए गए फॉर्मूले के हिसाब से उसे कम से कम जरूरी वोट भी हासिल करने होते हैं।

राज्यसभा चुनाव के लिए फॉर्मूला

  • कुल विधायकों की संख्या/(राज्यसभा की सीटें+1)= +1

ऐसे समझिए

दरअसल राज्यसभा चुनाव में न तो गुप्त वोटिंग होती है और न ही इसमें ईवीएम का प्रयोग होता है। यहां वोटिंग की प्रक्रिया अन्य चुनाव से काफी अलग है। राज्यसभा चुनाव में भाग लेने वाले हर उम्मीदवारों के नाम के आगे एक से चार तक की संख्या लिखी होती है। किसी वोटर विधायक को अपनी वरीयता के आधार पर संख्या पर निशान लगाना होता है। फिर अपने मतपत्र को अपनी पार्टी के एजेंट को दिखाकर पेटी में डालते हैं। यह मतपत्र अपने पार्टी के एजेंट को न दिखाने पर अवैध हो जाता है। इसी तरह से अगर मतपत्र किसी दूसरी पार्टी के एजेंट को दिखाया जाए तो भी अवैध हो जाता है।

राज्य में राज्यसभा सीटें कैसे तय होती हैं?

ज्ञात रहे भारत में संसद के दो हिस्से हैं। लोकसभा और राज्यसभा। दोनों सदनों से कोई विधेयक पास होने के बाद ही राष्ट्रपति के पास जाता है। वहीं विधेयक पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद विधेयक कानून का रूप ले लेता है और पूरे देश में उसका पालन होने लगता है। बता दें कि राज्यसभा सीटों का आवंटन राज्य की जनसंख्या के आधार पर तय होता है। जिस राज्य में जितनी जनसंख्या है उस राज्य को उसी हिसाब से सीटें मिलती है। उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 31 राज्यसभा की सीटें हैं। राज्यसभा को संसद का उच्च सदन कहा जाता है। क्योंकि राज्यसभा एक स्थाई सदन है। यानी कि ये कभी भंग नहीं हो सकता है। इसके एक तिहाई सदस्य प्रत्येक दो वर्ष के बाद रिटायर होते हैं। राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल छह वर्ष का होता है। लोकसभा का कार्यकाल पांच वर्षों का होता है और वह अस्थाई सदन है।

राज्यसभा सीटों की संख्या

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80 में राज्यसभा के कुल सदस्यों की अधिकतम संख्या 250 तय की गई है। इनमें से 238 सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से चुने जाते हैं. राज्यसभा के 12 सांसदों को राष्ट्रपति सरकार की सलाह पर मनोनीत करते हैं। ये देश के प्रतिष्ठित लोग होते हैं। राज्यसभा के सदस्यों के लिए न्यूनतम उम्र सीमा 30 साल तय की गई है. जबकि लोकसभा सदस्यों के लिए यह सीमा 25 साल है। राज्यसभा की जिन सीटों के लिए कार्यकाल पूरा होता जाता है, चुनाव आयोग वहाँ के लिए नए चुनाव की घोषणा करता रहता है और उन सीटों पर नए सदस्य चुने जाते हैं।